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कृषि सब्सिडी : किसानों को दी जाने वाली विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता के बारे में जानें

कृषि सब्सिडी : किसानों को दी जाने वाली विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता के बारे में जानें

भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान आज भी बहुत बड़ा है और भारत की ग्रामीण जनसंख्या का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा, मुख्यतया कृषि पर ही निर्भर है। 2021 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार कृषि और उससे जुड़े हुए सेक्टर, भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद यानी की जीडीपी (GDP - Gross Domestic Product) में 18% योगदान देते है। आजादी के समय यह अनुपात 70 प्रतिशत से 80 प्रतिशत के बीच में था। विभिन्न वैज्ञानिक अनुसंधानों और नई तकनीकों की मदद तथा भारत सरकार के सकारात्मक अप्रोच और कृषि क्षेत्र में युवा किसानों की बढ़ती भागीदारी की वजह से, आने वाले समय में यह सेक्टर अच्छी उत्पादकता की ओर अग्रसर होता नजर आ रहा है। इसी उत्पादकता को सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार और कुछ राज्य सरकारें किसानों को सब्सिडी के रूप में कुछ सहायता प्रदान करती है

क्या है कृषि सब्सिडी (Agricultural Subsidy) ?

किसी भी निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार के द्वारा किसानों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता सब्सिडी के अंतर्गत आती है।यह वित्तीय सहायता प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से किसानों तक पहुंचाई जाती है। वित्त आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के किसानों के द्वारा प्रति हेक्टेयर जमीन से प्राप्त होने वाली आय में 21 प्रतिशत योगदान सरकार के द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का होता है।

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कौन देता है भारत में कृषि सब्सिडी ?

भारतीय किसानों को स्थानीय राज्य सरकारों के अलावा मुख्यतः भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के द्वारा सब्सिडी प्रदान की जाती है, लेकिन अप्रत्यक्ष सब्सिडी के तौर पर केमिकल और फर्टिलाइजर मंत्रालय तथा कॉमर्स मंत्रालय के द्वारा भी सहायता दी जाती है। भारत में दी जाने वाली सब्सिडी पूर्णतया सरकार के द्वारा ही तय होती है, यदि बात करें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दी जाने वाली सब्सिडी की तो इन्हें मुख्यतः विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organisation) के द्वारा नियंत्रित किया जाता है और अलग-अलग देशों को उनकी आर्थिक स्थिति के आधार पर सब्सिडी देने में छूट प्रदान की गई है। वर्तमान में भारत विश्व व्यापार संगठन में एक विकासशील देश की श्रेणी में सम्मिलित किया गया है, इसी वजह से भारत को विकसित देशों की तुलना में अधिक सब्सिडी देने के लिए छूट दी गई है।

भारत सरकार के द्वारा दी जाने वाली अलग-अलग प्रकार की सब्सिडी :

हरित क्रांति के समय से ही भारत सरकार के द्वारा किसानों को आर्थिक सहयोग के तौर पर सब्सिडी दी जा रही है और इस क्रांति के दौरान बुवाई किए गए उच्च उत्पादकता वाले बीजों के बेहतर उत्पादन के लिए पानी और उर्वरकों के रूप में भारतीय किसानों को सब्सिडी देने की शुरुआत की गई थी। वित्त आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी को निम्न प्रकार से विभाजितकिया जा सकता है :-

  • उर्वरक पर दी जाने वाली सब्सिडी (Fertilizer Subsidy) :

भारतीय कृषि को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने लायक बनाने के लिए किसानों को सस्ती दर पर रासायनिक उर्वरकों को उपलब्ध करवाने के लिए सरकार के द्वारा फर्टिलाइजर सब्सिडी की शुरुआत की गई थी। यह सब्सिडी मुख्यत: उर्वरक उत्पादक कंपनियों को प्रदान की जाती है, जो कि किसानों को सस्ते दामों पर यूरिया और डीएपी उपलब्ध करवाती है। इस सब्सिडी की मदद से कृषि में कच्चे माल के रूप में होने वाले खर्चे कम हो जाते है और पूरे भारत में उर्वरकों की एक समान कीमत बनी रहती है।

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सरकार के द्वारा किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी में फर्टिलाइजर सब्सिडी का योगदान सर्वाधिक है। वर्तमान में भारत सरकार कुछ सूक्ष्म उर्वरक जैसे कि नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम के अलावा जिंक तथा आयरन जैसे रासायनिक उर्वरकों पर भी फर्टिलाइजर सब्सिडी उपलब्ध करवा रही है।

  • सीधे हस्तांतरण के तहत दी जाने वाली सब्सिडी (Direct Benefit transfer subsidy) :

 2019 में शुरू की गई है प्रत्यक्ष स्थानांतरण सब्सिडी वर्तमान में भारत के सभी किसानों को सीधे नकद राशि उपलब्ध करवाकर प्रदान की जाती है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम (PM-KISAN) के तहत हर किसान भाई को 6000 रुपए सालाना उपलब्ध करवाए जाते है। केंद्र सरकार के द्वारा प्रायोजित इस स्कीम में शुरुआत में लघु और सीमांत किसानों को ही शामिल किया गया था। खेती की सामान्य जरूरतमंद आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए शुरू की गई यह स्कीम भारत की किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प के रूप में उपलब्ध हुई है।

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  • बिजली पर दी जाने वाली सब्सिडी ( Power Subsidy) :

आधुनिक कृषि के दौर में मशीनीकरण की वजह से इस्तेमाल होने वाले पावर पंप और दूसरी इलेक्ट्रिक मशीनों के लिए सरकार के द्वारा किसानों को सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध करवाई जाती है।

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 मुख्यतः बिजली का इस्तेमाल सिंचाई की प्रक्रिया के दौरान होता है। यह सब्सिडी बिजली उत्पादक डिस्कोम कंपनियों को दी जाती है, जोकि बिजली की सामान्य रेट की तुलना में किसानों को सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध करवाती है। स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड और भारत की कई बड़ी सरकारी कंपनी के द्वारा किसानों को इस तरह की सब्सिडी उपलब्ध करवाई जा रही है।

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कृषि अनुसंधान कार्यों में तेजी लाने के लिए सरकार के द्वारा कृषि वैज्ञानिकों को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान करने के अलावा, किसान भाइयों के लिए उच्च उत्पादकता प्रदान करने वाले बीजों (High yielding seed) की व्यवस्था भी सरकार के द्वारा सीड सब्सिडी के तहत ही की जाती है। इन बीजों को बहुत ही कम दर पर उपलब्ध करवाने पर किसान भाई आसानी से अपने खेत में होने वाले लागत को कम कर पाते है। एक अप्रत्यक्ष सब्सिडी के तौर पर सरकार के द्वारा बीज उत्पादन करने वाली कंपनियों को प्रदान की जाने वाली यह सब्सिडी कम्पनियों  की बीज विनिर्माण लागत को कम करती है और स्वतः ही बाजार में सस्ते बीज उपलब्ध हो पाते हैं।

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  • निर्यात पर दी जाने वाली सब्सिडी (Export Subsidy) :

भारत शुरुआत से ही एक कृषि प्रधान देश रहा है और इसी वजह से भारत में तैयार कृषि को अंतरराष्ट्रीय मार्केट में शुरुआत से ही एक अलग पहचान मिली हुई है, परंतु पिछले कुछ समय से कई देशों में कृषि क्षेत्र में बढ़ते अनुसंधान कार्यों और नई खोजों के बाद भी भारतीय कृषि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए सरकार के द्वारा निर्यात पर सब्सिडी दी जाती है। यह सब्सिडी किसी किसान या फिर कृषि उत्पादों से जुड़ी निर्यात कंपनी को दी जाती है। इस सब्सिडी का फायदा यह होता है कि इससे भारत में विदेशी धन आने के अलावा स्थानीय स्तर पर किसानों के द्वारा मुनाफा कमाया जा सकता है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात में दी जाने वाली सब्सिडी को विश्व व्यापार संघ के द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के तहत ही दिया जा सकता है।

  • लोन पर दी जाने वाली सब्सिडी (Credit Subsidy ) :

यह बात तो हम जानते ही है कि भारतीय कृषि क्षेत्र में लघु और सीमांत किसान बहुत ही अधिक संख्या में है। ऐसे किसानों के पास बुवाई और खेती की शुरुआत करने के लिए छोटे क्षेत्र की जमीन तो होती है, परंतु शुरुआत में आने वाली लागत के लिए आर्थिक व्यवस्था नहीं होती है, इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार के द्वारा किसान भाइयों को ऋण पर सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिसे क्रेडिट सब्सिडी भी कहा जाता है।

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बैंक के द्वारा एक सामान्य ग्राहक के तौर पर लगायी जाने वाली ब्याज दर पर सरकार के द्वारा कुछ प्रतिशत ब्याज दर स्वयं के द्वारा जमा करवायी जाती है, इसे इंटरेस्ट सब्वेंशन (Interest subvention)  के नाम से भी जाना जाता है। हाल ही में आत्मनिर्भर भारत स्कीम के तहत किसान भाइयों को ब्याज ऋण अदायगी में सरकार के द्वारा अच्छी सब्सिडी उपलब्ध करवाई गई है। इस प्रकार की ऋण व्यवस्था में किसान भाइयों को किसी भी प्रकार की संपार्श्विक (collateral) जमा करवाने की आवश्यकता नहीं होती है और बड़ी ही आसानी से ग्रामीण क्षेत्रों के किसान भी कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों तथा बीज और दूसरे कच्चे माल के लिए कम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर सकते है।

  • कृषि उपकरणों पर दी जाने वाली सब्सिडी (Agriculture Equipment Subsidy) :

भारत सरकार के द्वारा अलग-अलग स्कीम के तहत किसान भाइयों को कृषि में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की खरीद के लिए सब्सिडी प्रदान की जाती है। यह सब्सिडी मुख्यतः उपकरण की खरीद के बाद किसान भाइयों को उनके बैंक खाते में सीधे हस्तांतरण के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाती है।

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 अलग-अलग राज्य सरकारें अपना योगदान मिलाकर भारत सरकार के द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी में सहयोग प्रदान कर सकती है। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में विनिर्माण (Infrastructure) से जुड़े कार्यों को पूर्ण करने के लिए भारत सरकार के द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर सब्सिडी भी उपलब्ध करवाई जाती है। इस तरह की सब्सिडी की मदद से किसान भाइयों को तैयार कृषि उत्पादों को एक जगह से दूसरी जगह पर स्थानांतरित करने के लिए इस्तेमाल में होने वाले वाहन तथा कोल्ड स्टोरेज हाउस बनाने के लिए राशि उपलब्ध करवाई जाती है। 

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कैसे प्राप्त करें कृषि सब्सिडी और आवश्यक योग्यताएं ?

यदि किसी सब्सिडी के लिए लघु, सीमांत और बड़े किसानों के लिए आवश्यक योग्यताएं अलग-अलग है तो इसके लिए आपको अलग से कृषि मंत्रालय या फिर दूसरे मंत्रालय (जो कि सब्सिडी को उपलब्ध करवा रहा है) कि वेबसाइट पर जाकर अपना निशुल्क पंजीकरण करवाना होगा। यदि बात करें इन सब्सिडी में अलग-अलग योग्यताओं की तो कई प्रकार की सब्सिडी केवल लघु और सीमांत किसानों के लिए ही उपलब्ध है, ऐसी सब्सिडी प्राप्त के लिए स्थानीय प्रशासन के द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के साथ किसान सेवा केंद्र में जाकर पंजीकरण करवाना होगा।आय और दूसरे कई आधारों पर दी जाने वाली सब्सिडी के तहत भी अलग से रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता होगी। मुख्यतः खाते में सीधे हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer) के तहत मिलने वाली सब्सिडी के दौरान ही इस तरह के पंजीकरण की आवश्यकता होती है, अप्रत्यक्ष रूप से मिलने वाली सब्सिडी सभी किसान भाइयों के लिए उपलब्ध होती है।

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कृषि सब्सिडी की मदद से किसान भाइयों को होने वाले फायदे :

वर्तमान समय की प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था में भारतीय कृषि को संपन्न बनाने के पीछे कृषि क्षेत्र में दी जाने वाली सब्सिडी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, इन्हीं सब्सिडी की मदद से भारतीय किसान स्वयं की जरूरतें तो पूरी करता ही है, साथ ही तैयार कृषि उत्पादों को आसानी से बेचकर मुनाफा भी कमा सकता है। इन कृषि सब्सिडी की मदद से खेती की शुरुआत में आने वाली प्रारंभिक लागत में काफी कमी हो जाती है। वित्त आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार यदि भारतीय किसान को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सब्सिडी उपलब्ध ना करवाई जाए तो उनके खेत से प्राप्त होने वाला मुनाफा 50 प्रतिशत तक कम हो सकता है। किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम की मदद से उपलब्ध करवाए जाने वाले सस्ते लोन किसानों की खेती में इस्तेमाल होने वाली आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति के अलावा एक बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में भी सहायक साबित हुए है।

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आशा करते है कि हमारे किसान भाइयों को Merikheti.com के माध्यम से भारत सरकार और राज्य सरकारों के द्वारा कृषि से जुड़ी हुई सब्सिडी के बारे में संपूर्ण जानकारी मिल गई होगी, साथ ही इन सब्सिडी के लिए योग्यता तथा इनके लिए पंजीकरण कराने की प्रक्रिया का भी पता चल गया होगा। यही उम्मीद है कि भविष्य में आप भी सरकार के द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही सब्सिडी का इस्तेमाल कर अपने खेत की उत्पादकता को बढ़ाने के साथ ही मुनाफे में भी बढ़ोतरी कर पाएंगे।

13 फसलों के जीएम बीज तैयार करने के लिए रिसर्च हुई शुरू

13 फसलों के जीएम बीज तैयार करने के लिए रिसर्च हुई शुरू

भारत सरकार लगातार देश में उत्पादन बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसके लिए सरकार तरह-तरह की परियोजनाएं लाती रहती है, जिससे किसानों को उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सके। इन परियोजनाओं के अंतर्गत सरकार किसानों को सीधे अनुदान देने के अलावा खाद, बीज, दवाई और कृषि उपकरणों पर सब्सिडी प्रदान करती है। इसके साथ ही अब सरकार ने देश भर में गुणवत्तापूर्ण फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए रिसर्च पर जोर देना शुरू कर दिया है। इसके तहत अब भारत के कृषि वैज्ञानिक जेनेटिक मॉडिफाइड यानि जीएम फसलों का विकास कर रहे हैं। फिलहाल, जीएम फसलों को लेकर देश दो धड़ों में बंटा हुआ है। एक धड़ा वो है, जो फसलों में जेनेटिकली मॉडिफिकेशन का विरोध कर रहा है। ऐसे लोग इसे नेचर के खिलाफ बता रहे हैं। वहीं दूसरा धड़ा वो है, जो जीएम फसलों को देश के लिए और लोगों के लिए सही बता रहा है और इस प्रकार की रिसर्च का समर्थन कर रहा है। हालांकि इस विरोध और समर्थन के बीच देश के संस्थानों में जेनेटिक मॉडिफाइड फसलों पर रिसर्च शुरू हो चुका है। अगर यह रिसर्च कामयाब रहती है, तो कुछ दिनों में देश के किसान जेनेटिक मॉडिफाइड फसलों की खेती करते हुए दिखाई देंगे। इन फसलों की खेती से किसानों का उत्पादन बढ़ेगा, साथ ही साथ आने वाले दिनों में किसानों की आय में भी भारी इजाफा हो सकता है।


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इन जेनेटिक मॉडिफाइड फसलों पर रिसर्च हुई है शुरू

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि देश के कृषि मंत्रालय ने अलग-अलग अनुसंधान केंद्रों को जीएम फसलों पर रिसर्च की जिम्मेदारी दी है। जहां देश के वैज्ञानिक 13 जीएम फसलों पर रिसर्च कर रहे हैं। इन फसलों में चावल, गेहूं, गन्ना, आलू, अरहर, चना और केला जैसी फसलें शामिल हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जीएम फसलों की उपज के बाद भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। फसलों का ज्यादा उत्पादन होने के कारण अनाज के लिए अन्य देशों पर निर्भरता कम होगी। इसके साथ ही कृषि मंत्रालय ने कहा है कि जीएम बीजों की पैदावार से फसल की क्वालिटी सुधरेगी और उत्पादन में बंपर इजाफा होगा। कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया है, कि इन फसलों को जेनेटिकली मॉडिफाइड करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिक दिन रात मेहनत कर रहे हैं।

इस फसल के बीज अभी तक हो चुके हैं विकसित

अभी तक सरसों के बीजों को जेनेटिक मॉडिफाइड रूप से विकसित किया जा चुका है। इन विकसित बीजों को धारा मस्टर्ड हाईब्रिड (डीएमएच-11) बीज का नाम दिया गया है, जो सरसों के बीजों की एक हाईब्रिड प्रजाति है। इस प्रजाति को दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर जेनेटिक मैनिपुलेशन ऑफ क्रॉप प्लांट्स ने विकसित किया है। अनुसंधान केंद्र का दावा है, कि इन बीजों का इस्तेमाल करने से भारत की दूसरे देशों पर खाद्य तेल को लेकर निर्भरता बहुत हद तक कम हो जाएगी। इस साल अक्टूबर में भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने सरसों के जीएम बीजों का परीक्षण करने की अनुमति दी थी। आनुवंशिक रूप से संशोधित इस फसल का देश भर में परीक्षण शुरू हो चुका है। कई जगहों पर इन बीजों की बुवाई भी की गई है। जिसके शानदार परिणाम देखने को मिले हैं। आगामी 2 सालों के दौरान देश भर में जीएम सरसों का उत्पादन शुरू हो जाएगा। फिलहाल देश भर में जीएम कपास का बंपर उत्पादन हो रहा है।
इस राज्य में धान की खेती के लिए 80 फीसद अनुदान पर बीज मुहैय्या करा रही राज्य सरकार

इस राज्य में धान की खेती के लिए 80 फीसद अनुदान पर बीज मुहैय्या करा रही राज्य सरकार

किसानों की उन्नति एवं प्रगति के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है बिहार सरकार की तरफ से किसानों के लिए सहूलियत प्रदान की गई है। राज्य के किसान भाइयों को 50 से 80 प्रतिशत तक के अनुदान पर धान का बीज मुहैय्या कराया जा रहा है। किसान भाइयों को सस्ती दर पर बीज प्राप्त हो जाएगा। धान हो या गेहूं समस्त फसलों की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से कवायद की जा रही है। बिहार राज्य के अंतर्गत भी लाखों की तादात में किसान खेती-किसानी से जुड़े हैं। राज्य सरकार का प्रयास कोशिश यही रहता है, कि किसान भाइयों को अनुदानित दर पर बीज प्राप्त हो सके। प्रत्येक किसान अच्छी गुणवत्ता का बीज हांसिल कर सके। अब धान की पैदावार को लेकर बिहार सरकार द्वारा किसानों को बड़ी राहत प्रदान की है। किसानों को बीज अच्छे-खासे अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य सरकार ने बताया है, कि किसान निर्धारित समय सीमा तक पंजीकरण करवाके धान का बीज प्राप्त कर सकते हैं।

बिहार सरकार 80 प्रतिशत अनुदान प्रदान कर रही है

बिहार सरकार की तरफ से मधेपुरा जनपद में धान की खेती को बढ़ावा देने के लिए बीज पर मोटा अनुदान दिया जा रहा है। बिहार सरकार अच्छी गुणवत्ता के बीज 50 से 80 प्रतिशत अनुदान पर मुहैय्या करा रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है, कि अनुदान पर बीज देने को लेकर कृषकों को जागरूक किया जा रहा है। किसान भाइयों को 3 किस्मों के बीजों पर अनुदान प्रदान किया जाएगा। ये भी पढ़े: इस राज्य सरकार ने की घोषणा, अब धान की खेती करने वालों को मिलेंगे 30 हजार रुपये

पंजीकरण की प्रक्रिया 30 मई तक ही हो पाएगी

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है, कि अनुदान पर बीज प्राप्त करने के लिए किसानों का पंजीकरण होना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए किसानों को अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण करवाना होगा। पंजीकरण कराने की आखिरी तारीख 30 मई है। इसके उपरांत आवेदन मंजूर नहीं किए जाएंगे। इसके पश्चात विभागीय स्तर से आवेदकों का सत्यापन सुनिश्चित कराया जाएगा। जो किसान असलियत में पात्र हैं, उनको 15 मई से बीज बाटने की प्रक्रिया चालू कर दी जाएगी।

इस तरह अनुदान प्राप्त हो रहा है

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है, कि मुख्यमंत्री तीव्र बीज उत्थान योजना के अंतर्गत धान के बीज पर 80 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाएगा। वहीं, बीज वितरण योजना के अंतर्गत किसान को 50 फीसद अनुदान मुहैय्या कराया जाएगा। मधेपुरा जनपद में होने वाली सर्वाधिक धान की खेती संकर धान पर 50 फीसद तक अनुदान मिलेगा। बतादें, कि बिहार राज्य धान की खेती के लिए काफी मशूहर है। परंतु, विगत वर्ष बारिश कम होने की वजह से धान के उत्पादन रकबे में 4.32 लाख हेक्टेयर तक गिरावट दर्ज हुई है।